मीडिया सामग्री के सर्वज्ञ        
 
एक संक्षिप्त प्रोफाइल

इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर एक विशिष्ट मीडिया शोध संस्थान है जिसने विभिन्न सम-सामयिक मुद्दों पर अपने ताज़गीभरे विश्लेषणों और नये-नये विचारों से देश के बौद्धिक वर्ग का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। जुलाई 1997 में स्थापित इस संस्थान से दो दर्जन से ज्यादा प्रखर पत्रकार, बुद्धिजीवी, राजनीतिक विश्लेषक, समाजविज्ञानी, अर्थशास्त्री, वैज्ञानिक, साहित्यकार, एक्टिविस्ट तथा कई दूसरे क्षेत्रों के विशिष्ट लोग जुड़े हुए हैं। संस्थान की स्थापना के बाद से ही इसकी गतिविधियों में लगातार इजाफा हो रहा है।

मुख्य गतिविधियां:

 यह संस्थान देश के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक तथा दूसरे सम-सामयिक मुद्दों पर हर सप्ताह नियमित रूप से देश के सभी मुख्य अखबारों को लगभग 30 लेख, फीचर, रिपोर्ताज़, विश्लेषण तथा विभिन्न दूसरी सामग्री उपलब्ध कराता है।
 विभिन्न विषयों की पाक्षिक, साप्ताहिक और मासिक पत्र-पत्रिकाओं को भी उनकी मांग के अनुकूल नियमित तथा विशेषांकों के लिए सामग्री उपलब्ध करायी जाती है।
 रेडियो के विभिन्न कार्यक्रमों और टीवी चैनलों के लिए डाक्यूमेंट्री आदि के निर्माण में यह संस्थान शोध सामग्री, पटकथा, मैनस्क्रिप्ट तथा आइडिया आदि उलब्ध कराता है।
 यह संस्थान पिछले 7 सालों से रेडियो कार्यक्रम बना रहीं विभिन्न कंपनियों के लिए, विभिन्न विषयों के रेडियो धारावाहिक लिख रहा है। आज तक संस्थान 200 एपीसोड से ज्यादा रेडियो धारावाहिक लिख चुका है; जिसमें देश एवं विदेश के महान साहित्यकारों की कहानियों, उपन्यासों तथा यात्रा वृत्तांतों का रेडियो रूपांतरण के साथ मौलिक लेखन भी शामिल है। संस्थान के पास एक दर्जन से ज्यादा मंझे हुए लेखक हैं जिनकी अलग-अलग विषयों पर गहरी पकड़ है। जिसके चलते बहुत कम समय में ही संस्थान विभिन्न विषयों, महान साहित्यकारों की साहित्यिक कृतियों का रेडियो रूपांतरण करने में सक्षम है। मौलिक विषयों पर डाँक्यू-ड्रामा शैली में संस्थान किसी भी विषय पर 13, 26 या 52 कड़ियों का शानदार सीरियल उपलब्ध करा सकता है।
 संस्थान के पास रेडियो के पहले से मौजूद विभिन्न कार्यक्रमों को मौलिक और ताजगी भरे अंदाज में नये सिरे से प्रस्तुत करने के विचार भी हैं। गीत-संगीत के कार्यक्रमों को कैसे अधिक जनरूचि का और जानकारी से परिपूर्ण बनाया जा सकता है। संस्थान के पास इस संबंध में भी एक मुकम्मिल रूपरेखा है। जिसकी सेवाएं वह रेडियो के लिए सॉफ्टवेर बना रही कई कंपनियों के लिए समय-समय पर देता रहता है।
 संस्थान किसी खास मुद्दे पर अपनी तरफ से या किसी संस्थान/कंपनी की मांग पर संक्षिप्त और वृहद सर्वेक्षण भी करता है।
 विभिन्न क्षेत्रों में शोध करने वालों को यह संस्थान शोध सामग्री और निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए जरूरी ‘फैक्ट फिगर’ उपलब्ध कराता है।
 किसी भी सम-सामयिक या पुराने मुद्दे अथवा विषय पर यह संस्थान मौखिक विचार, टिप्स और अपडेट के साथ ही लिखित सामग्री भी प्रदान करता है।
 किसी विषय पर बोलने अथवा लिखने की तैयारी कर रहे लोगों को यह संस्थान मौखिक परिसंवाद तथा लिखित सामग्री से सहायता करता है।
 पत्रिकाओं को उनके विशेष अंक, अखबारों को सप्लीमेंट आदि के लिए विषय, आउटलाइन, पूरी सामग्री अथवा कंसल्टेंसी की सुविधा भी संस्थान द्वारा प्रदान की जाती है।
 महत्वपूर्ण व प्रासंगिक विषयों पर संस्थान शोधपरक पुस्तकें भी प्रकाशित करता है। 1857 की क्रांति, मिस्टिसिज़्म और सुपर नैचुरल बीइंग विषयों पर शोध पूर्ण होकर पुस्तकों के रूप में प्रकाशित व चर्चित हो चुकी हैं।


शीघ्र शुरू होने वाली अन्य गतिविधियां:

 जल्द ही यह संस्थान विभिन्न सम-सामयिक विषयों पर नियमित रूप से गंभीर और पठनीय किताबों का नियमित प्रकाशन शुरू करने जा रहा है। संस्थान पहले भी 1997-98 में ‘मुलाकात-50’ नाम से एक चर्चित किताब का प्रकाशन कर चुका है। यह किताब भारतीय स्वतंत्रता के 50 साल पूरे होने पर विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के गहन साक्षात्कारों पर आधारित है।
 संस्थान नागपुर से प्रकाशित अखबार लोकमत के लिए 1997-98 में 20वीं सदी की महानतम भारतीय हस्तियों पर एक किताब तैयार कर चुका है।
 संस्थान निकट भविष्य में भारत के विभिन्न क्षेत्रों के राजनीतिक शिक्षण और विकास पर एक वृहद सर्वेक्षण की योजना रखता है। इसके साथ ही राजनीतिक विषय पर टीवी के लिए एक टाँक शो की योजना बना रहा है।